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12 अगस्त को मनाया जा रहा National Library Day भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन को समर्पित है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पुस्तकालय सिर्फ किताबों के भंडार नहीं, बल्कि ज्ञान के जीवंत मंदिर होते हैं। और इसी की मिसाल बनकर उभरी है दिल्ली विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक लाइब्रेरी, जो आज डिजिटल युग में भी लाखों छात्रों की प्रेरणा बनी हुई है। आइए, इस खास मौके पर जानते हैं क्यों डीयू लाइब्रेरी सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की शैक्षिक धरोहर है।

दिल्ली विश्वविद्यालय लाइब्रेरी (Library) की नींव 1922 में रखी गई, जब विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। शुरुआत छोटी थी – किताबें वाइस रीगल लॉज के कन्वेंशन हॉल में रखी जाती थीं। 1958 में यह पुस्तकालय आर्ट्स फैकल्टी में शिफ्ट हुआ, और फिर 1970 तक आते-आते यह एक पूरी लाइब्रेरी सिस्टम में तब्दील हो गया। आज यह सिर्फ एक लाइब्रेरी नहीं, बल्कि 34 विशेषज्ञ पुस्तकालयों का विशाल नेटवर्क है, जिसमें शामिल हैं:
17.5 लाख किताबों का खजाना: जहाँ हर सवाल का जवाब मिलता है
डीयू लाइब्रेरी सिस्टम भारत के सबसे बड़े शैक्षणिक संग्रहों में गिना जाता है। विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, यहाँ उपलब्ध हैं:
डिजिटल क्रांति: जब पुस्तकालय घर में समा आया!
डॉ. रंगनाथन ने कभी सपना देखा होगा कि पुस्तकालय हर छात्र तक पहुँचेगा। डीयू ने इसे 2021 में डीयू ई-लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म लाकर सच कर दिखाया। इसकी खासियतें जानकर आप हैरान रह जाएंगे:
डीयू लाइब्रेरी सिर्फ आधुनिकता की ही नहीं, इतिहास की भी संरक्षक है। सेंट्रल लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर है विशेष शोध खंड, जहाँ बैठकर दुर्लभ संसाधनों का अध्ययन होता है। यहाँ संग्रहित हैं:
नए भवन से नई उम्मीदें: विस्तार की ओर बढ़ते कदम
वर्तमान में डीयू सेंट्रल लाइब्रेरी 4,700 वर्ग मीटर में फैली है, लेकिन यहाँ रुकने का कोई इरादा नहीं! विस्तार का काम जोरों पर है और जल्द ही यह लाइब्रेरी 18,500 वर्ग मीटर से भी बड़े परिसर में फैल जाएगी। इसका मतलब है:

सिर्फ डीयू नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली का गौरव!
डीयू लाइब्रेरी की पहुँच और प्रसिद्धि सिर्फ अपने छात्रों तक सीमित नहीं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र और शोधार्थी भी यहाँ आकर संसाधनों का लाभ उठाते हैं। लाइब्रेरी का शांत वातावरण, विशाल संग्रह और 24×7 खुला रहना इसे दिल्ली की पठन संस्कृति का हृदय बना देता है।
डॉ. रंगनाथन के सपनों को सच करती एक मिसाल
राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस पर जब हम डॉ. एस. आर. रंगनाथन को याद करते हैं, तो डीयू लाइब्रेरी उनकी उस दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण लगती है। यहाँ परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल है – एक तरफ 702 पांडुलिपियों का इतिहास, तो दूसरी तरफ 72 डिजिटल डेटाबेस का भविष्य। यह सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि जिज्ञासा, खोज और सीखने का मंदिर है।
जैसे-जैसे यह लाइब्रेरी विस्तार करेगी, वैसे-वैसे यह और छात्रों के सपनों को पंख देगी। डॉ. रंगनाथन ने कहा था – “पुस्तकालय एक बढ़ता हुआ जीव है।” दिल्ली विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी इस कथन को सच साबित कर रही है। आइए, इस राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस पर हम सब उन संस्थानों का सम्मान करें जो ज्ञान की इस ज्योत को जलाए रखने में लगे हैं।
(दिल्ली विश्वविद्यालय पुस्तकालय से जुड़े अपने अनुभव हमारे साथ कमेंट में जरूर साझा करें!)
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