Tuesday, January 6, 2026
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    Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन की पात्रता

    I. परिचय (Delhi University)

    Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन अवकाश का महत्व

    Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन अवकाश कर्मचारियों के व्यावसायिक विकास और कौशल उन्नयन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह अवकाश कर्मचारियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने, विशिष्ट प्रशिक्षण लेने, या अपने संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता बढ़ाने में सक्षम बनाता है। इस तरह का विकास न केवल व्यक्तिगत कर्मचारी के करियर पथ को समृद्ध करता है, बल्कि विश्वविद्यालय के समग्र कार्यबल की दक्षता और क्षमता को भी बढ़ाता है। यह कर्मचारियों को नए ज्ञान और विश्लेषणात्मक कौशल हासिल करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वे अपनी भूमिकाओं में अधिक प्रभावी ढंग से योगदान कर सकें ।  

    यह समझना महत्वपूर्ण है कि अध्ययन अवकाश का उद्देश्य व्यापक है, जो कर्मचारियों के कौशल और ज्ञान को बढ़ाना है। हालांकि, इस लाभ की शर्तें, विशेष रूप से वेतन संबंधी प्रावधान, कर्मचारी की श्रेणी (जैसे शिक्षण या गैर-शिक्षण) के आधार पर भिन्न हो सकती हैं। प्रस्तुत विश्लेषण में, यह स्पष्ट हो जाता है कि “पूर्ण वेतन” के साथ अध्ययन अवकाश के अधिकांश प्रावधान मुख्य रूप से शिक्षण कर्मचारियों के लिए हैं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन पात्रता को समझने के लिए स्पष्ट रूप से संबोधित किया जाना चाहिए।

    गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश के संबंध में सामान्य जानकारी

    यह रिपोर्ट दिल्ली विश्वविद्यालय के एक गैर-शिक्षण कर्मचारी के रूप में अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन पात्रता से संबंधित विशिष्ट प्रश्न का समाधान करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए ‘अध्ययन अवकाश’ एक उपलब्ध अवकाश प्रकार है । इस अवकाश का लाभ उठाने के लिए प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, और प्रशासनिक कार्यालय संबंधित कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में आवश्यक प्रविष्टियाँ करता है ।  

    दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘गैर-शिक्षण कर्मचारी (सेवा के नियम और शर्तें) नियम-2013’ में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश का प्रावधान शामिल है। इन नियमों के अनुसार, कर्मचारी कार्यकारी परिषद द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों के अनुसार अध्ययन अवकाश के लिए पात्र हैं । यह तथ्य कि गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश का अस्तित्व है, एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक बिंदु है। हालांकि, यह जानना आवश्यक है कि वेतन संबंधी विवरणों को कार्यकारी परिषद के “नियमों के अनुसार” संदर्भित किया जाता है, जिसका अर्थ है कि सामान्य अवकाश नियमों में सीधी वेतन पात्रता का उल्लेख नहीं हो सकता है, जिससे आगे की विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है।  

    II. दिल्ली विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश के नियम

    अध्ययन अवकाश की पात्रता और शर्तें

    अध्ययन अवकाश को अक्सर एक अधिकार के बजाय एक विशेषाधिकार माना जाता है। इसका अर्थ है कि सक्षम प्राधिकारी, जैसे कि प्रिंसिपल, के पास इसे अस्वीकृत करने या रद्द करने का विवेक होता है, यदि सेवा की आवश्यकताएं इसकी मांग करती हैं। अध्ययन अवकाश का लाभ उठाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है ।  

    अध्ययन अवकाश की स्वीकृति के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि प्रस्तावित अध्ययन या प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से निश्चित लाभ का होना चाहिए । यह शर्त अक्सर सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में अध्ययन अवकाश के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड होती है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी के कौशल और ज्ञान में वृद्धि से विश्वविद्यालय को भी लाभ हो। विश्वविद्यालय केवल तभी अवकाश प्रदान करेगा जब उसे कर्मचारी के अध्ययन से लाभ होगा, जिससे कर्मचारी को अपने आवेदन में अध्ययन के लाभ को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल मिलता है।  

    अधिकतम अवधि

    दिल्ली विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश की अधिकतम अवधि 2 वर्ष (24 महीने) निर्धारित की गई है । यह अवधि सार्वजनिक हित में अध्ययन के लिए दिए गए असाधारण अवकाश के लिए भी लागू होती है । विभिन्न स्रोतों में अधिकतम अवधि की यह निरंतरता इस जानकारी की विश्वसनीयता को बढ़ाती है। यह सीमा कर्मचारी और विश्वविद्यालय दोनों के लिए योजना बनाने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय इस प्रकार के अवकाश के लिए एक निश्चित समय-सीमा बनाए रखता है। यह कर्मचारी को अपनी पढ़ाई की योजना बनाने और यह समझने में मदद करता है कि उन्हें कितने समय तक अवकाश पर रहना पड़ सकता है।  

    आवेदन प्रक्रिया और अनुमोदन

    अध्ययन अवकाश के लिए एक औपचारिक लिखित आवेदन प्रस्तुत करना आवश्यक है। इस आवेदन में अध्ययन का उद्देश्य, अवधि और सार्वजनिक हित में इसका औचित्य स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। आवेदन सक्षम प्राधिकारी (जैसे प्रिंसिपल) को अग्रिम रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए । यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कर्मचारी केवल मौखिक अनुरोध न करे, बल्कि एक औपचारिक आवेदन प्रक्रिया का पालन करे।  

    प्रशासनिक कार्यालय (Admin Office) अवकाश की स्वीकृति के बाद कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में आवश्यक प्रविष्टियाँ करेगा । आवेदन प्रक्रिया का औपचारिक स्वरूप और सेवा पुस्तिका में प्रविष्टियों का उल्लेख इस बात पर जोर देता है कि अध्ययन अवकाश एक आधिकारिक प्रक्रिया है जिसके लिए उचित दस्तावेज़ीकरण और अनुमोदन की आवश्यकता होती है। यह सुनिश्चित करता है कि अवकाश को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जाए, जो भविष्य में किसी भी विसंगति से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।  

    III. वेतन संबंधी प्रावधान: क्या पूर्ण वेतन देय है?

    मूल प्रश्न का सीधा उत्तर

    Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए, अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन देय नहीं होता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘गैर-शिक्षण कर्मचारी (सेवा के नियम और शर्तें) नियम-2013’ के अनुसार, अध्ययन अवकाश, विशेष रूप से सार्वजनिक हित में अध्ययन के लिए लिया गया, असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave – EOL) की श्रेणी में आता है । असाधारण अवकाश की अवधि के दौरान, कर्मचारी को  

    कोई अवकाश वेतन (leave salary) या अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिलते हैं । यह सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश को असाधारण अवकाश के रूप में वर्गीकृत करना सीधे तौर पर “कोई वेतन नहीं” के परिणाम की ओर ले जाता है। यह शिक्षण कर्मचारियों के लिए उपलब्ध अधिक अनुकूल वेतन प्रावधानों से एक स्पष्ट विचलन है।  

    शिक्षण कर्मचारियों के साथ तुलना और अंतर

    दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अधिकांश दिशानिर्देशों में, अध्ययन अवकाश पर पूर्ण वेतन या छात्रवृत्ति/वजीफा के साथ वेतन का प्रावधान विशेष रूप से “शिक्षण” कर्मचारियों (शिक्षकों/फैकल्टी) के लिए है । इन दस्तावेजों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए ऐसी विशिष्ट वेतन पात्रता का कोई उल्लेख नहीं है। वास्तव में, कई स्रोतों ने पुष्टि की है कि यूजीसी के दिशानिर्देशों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश या संबंधित वेतन प्रावधानों का कोई उल्लेख नहीं है, और ये प्रावधान उन पर लागू नहीं होते हैं ।  

    यह शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश वेतन लाभों के बीच एक सुसंगत और स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। “शिक्षक” शब्द का बार-बार उपयोग उन नियमों में होता है जो पूर्ण वेतन के साथ अध्ययन अवकाश प्रदान करते हैं, यह एक प्रवृत्ति है जो दर्शाती है कि ये लाभ केवल शैक्षणिक भूमिकाओं के लिए आरक्षित हैं। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए इन विशिष्ट प्रावधानों की अनुपस्थिति, असाधारण अवकाश से उनके अध्ययन अवकाश के संबंध के साथ मिलकर, इस अंतर को और मजबूत करती है। यह पैटर्न एक जानबूझकर नीतिगत भेद को इंगित करता है, जहाँ गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश को कम वित्तीय लाभों के साथ वर्गीकृत किया जाता है।

    छात्रवृत्ति या वजीफा प्राप्त होने पर वेतन पर प्रभाव

    केंद्रीय सरकार के कुछ सामान्य नियमों (जैसे CCS Leave Rules 1972) में यह प्रावधान है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अध्ययन अवकाश के दौरान छात्रवृत्ति या वजीफा प्राप्त करता है, तो भी अवकाश वेतन को अर्ध-वेतन अवकाश से कम नहीं किया जा सकता है । हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए, चूंकि अध्ययन अवकाश को असाधारण अवकाश माना जाता है, इसलिए छात्रवृत्ति या वजीफा प्राप्त होने पर भी कोई अवकाश वेतन देय नहीं होगा, क्योंकि असाधारण अवकाश में मूल रूप से कोई वेतन नहीं मिलता है । दिल्ली विश्वविद्यालय के विशिष्ट नियम इस मामले में केंद्रीय सरकार के सामान्य दिशानिर्देशों पर प्राथमिकता लेंगे। यह एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है; जबकि केंद्रीय सरकार के नियम कुछ वेतन की संभावना का सुझाव दे सकते हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय के अपने नियम असाधारण अवकाश के तहत अध्ययन अवकाश को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करते हैं, जिसका अर्थ है शून्य वेतन। इसलिए, दिल्ली विश्वविद्यालय के विशिष्ट नियम अंतिम और बाध्यकारी हैं, न कि अन्य सामान्य दिशानिर्देश।  

    तालिका 1: दिल्ली विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए विभिन्न प्रकार की छुट्टियाँ और उनकी वेतन स्थिति

    छुट्टी का प्रकारअवधि/पात्रता (सामान्य)वेतन स्थितिप्रासंगिकता
    आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL)छोटी अवधि के लिए, बीमारी या व्यक्तिगत कार्य हेतु। प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति आवश्यक।पूर्ण वेतनसामान्य अल्पकालिक अवकाश।
    अर्जित अवकाश (Earned Leave – EL)गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक कैलेंडर वर्ष में 30 दिन। 300 दिनों तक संचित किया जा सकता है।पूर्ण वेतनभुगतान किया गया अवकाश जिसे अध्ययन अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है।
    अर्ध-वेतन अवकाश (Half-Pay Leave – HPL)सेवा के प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए 20 दिन। चिकित्सा आधार पर या व्यक्तिगत मामलों के लिए।आधा वेतनभुगतान किया गया अवकाश जिसे अध्ययन अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है।
    असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave – EOL)विशेष परिस्थितियों में, जब कोई अन्य अवकाश देय न हो।कोई वेतन नहींअध्ययन अवकाश को इसी श्रेणी में माना जाता है।
    अध्ययन अवकाश (Study Leave)अधिकतम 2 वर्ष (24 महीने)। प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति आवश्यक। सार्वजनिक हित में अध्ययन के लिए।कोई वेतन नहींगैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अवैतनिक।

    IV. महत्वपूर्ण शर्तें और विचार

    सेवा में वापसी और बॉन्ड की आवश्यकता

    शिक्षण कर्मचारियों के लिए, अध्ययन अवकाश के बाद विश्वविद्यालय में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 3 वर्ष) के लिए सेवा करने का बॉन्ड निष्पादित करना अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें अवकाश वेतन और अन्य खर्चों की वापसी करनी होगी । यह विश्वविद्यालय के लिए एक सुरक्षा उपाय है ताकि अध्ययन अवकाश में किए गए “निवेश” का लाभ मिल सके।  

    हालांकि गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए विशिष्ट बॉन्ड का उल्लेख सीधे तौर पर नहीं किया गया है, यह एक सामान्य प्रथा है और यदि अध्ययन अवकाश “सार्वजनिक हित” में दिया गया है, तो विश्वविद्यालय द्वारा ऐसे बॉन्ड की आवश्यकता होने की प्रबल संभावना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कर्मचारी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस सेवा में लौटे । बॉन्ड की आवश्यकता विश्वविद्यालय के लिए एक निवेश सुरक्षा है। चूंकि अध्ययन अवकाश “सार्वजनिक हित” में दिया जाता है, विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि कर्मचारी अपनी बढ़ी हुई क्षमताओं के साथ वापस आए और सेवा करे।  

    अध्ययन की प्रगति रिपोर्ट जमा करना

    शिक्षण कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश के दौरान अपनी प्रगति की छह-मासिक रिपोर्ट पर्यवेक्षक या अध्ययन संस्थान के प्रमुख से रजिस्ट्रार/प्रिंसिपल को जमा करनी होती है । रिपोर्ट समय पर न मिलने पर अवकाश वेतन रोका जा सकता है ।  

    गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी ऐसी रिपोर्ट की आवश्यकता होने की संभावना है, खासकर यदि अवकाश सार्वजनिक हित में दिया गया हो। यह विश्वविद्यालय के लिए एक जवाबदेही तंत्र है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अवकाश का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। विश्वविद्यालय किसी भी प्रकार के अध्ययन अवकाश के लिए जवाबदेही चाहता है, और प्रगति रिपोर्ट यह सत्यापित करने का एक तरीका है कि कर्मचारी वास्तव में अध्ययन कर रहा है और अवकाश का उपयोग उस उद्देश्य के लिए कर रहा है जिसके लिए इसे स्वीकृत किया गया था।

    अन्य प्रकार की छुट्टियों के साथ संयोजन

    अध्ययन अवकाश को अर्जित अवकाश (Earned Leave), अर्ध-वेतन अवकाश (Half-Pay Leave) या असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) के साथ जोड़ा जा सकता है । हालांकि, कुल अनुपस्थिति की अधिकतम अवधि (जैसे 3 वर्ष या 5 वर्ष) का ध्यान रखना होगा । चूंकि अध्ययन अवकाश पर वेतन नहीं मिलता है, इसलिए इसे अर्जित अवकाश जैसे भुगतान किए गए अवकाश के साथ संयोजित करने की क्षमता कर्मचारी के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय राहत प्रदान कर सकती है। यह कर्मचारी के लिए एक व्यावहारिक विचार है, क्योंकि यह वित्तीय बोझ को कम करने में मदद कर सकता है।  

    सेवानिवृत्ति से पहले की अवधि के लिए नियम

    शिक्षण कर्मचारियों के लिए, अध्ययन अवकाश ऐसे शिक्षक को नहीं दिया जाएगा जो अध्ययन अवकाश की समाप्ति के बाद ड्यूटी पर लौटने की अपेक्षित तिथि से पांच साल के भीतर सेवानिवृत्त होने वाला हो । यह नियम गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होने की संभावना है, ताकि विश्वविद्यालय को उनके अध्ययन से प्राप्त नए कौशल और ज्ञान से पर्याप्त अवधि के लिए लाभ मिल सके। यह नियम विश्वविद्यालय के निवेश पर प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए है। चूंकि गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश भी “सार्वजनिक हित” में दिया जाता है, इसलिए विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि उन्हें कर्मचारी की बढ़ी हुई क्षमताओं का उपयोग करने के लिए पर्याप्त समय मिले।  

    तालिका 2: दिल्ली विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश की शर्तें और निहितार्थ

    शर्तविवरण/लागू नियमनिहितार्थ
    पात्रताकार्यकारी परिषद द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र। सार्वजनिक हित में अध्ययन का प्रमाण आवश्यक।अवकाश एक अधिकार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के विवेक पर दिया जाने वाला विशेषाधिकार है।
    अधिकतम अवधि2 वर्ष (24 महीने)।कर्मचारी को अपनी पढ़ाई और वित्तीय योजना इसी समय-सीमा के भीतर करनी होगी।
    वेतन स्थितिकोई वेतन नहीं। इसे असाधारण अवकाश (EOL) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।कर्मचारी को इस अवधि के लिए वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर रहना होगा।
    छात्रवृत्ति/वजीफा का प्रभावछात्रवृत्ति/वजीफा प्राप्त होने पर भी कोई वेतन देय नहीं।बाहरी वित्तीय सहायता वेतन की अनुपस्थिति की भरपाई कर सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय से कोई वेतन नहीं मिलेगा।
    बॉन्ड की संभावनाशिक्षण कर्मचारियों के लिए अनिवार्य। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी प्रबल संभावना, विशेषकर यदि सार्वजनिक हित में दिया गया हो।कर्मचारी को अध्ययन के बाद विश्वविद्यालय में एक निश्चित अवधि के लिए सेवा करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।
    प्रगति रिपोर्टशिक्षण कर्मचारियों के लिए छह-मासिक रिपोर्ट अनिवार्य। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी अपेक्षित।विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि अवकाश का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।
    अन्य छुट्टियों के साथ संयोजनअर्जित अवकाश, अर्ध-वेतन अवकाश, असाधारण अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है।कर्मचारी वित्तीय बोझ को कम करने के लिए भुगतान किए गए अवकाश का उपयोग कर सकता है।
    सेवानिवृत्ति से पहले की सीमाअवकाश की समाप्ति के बाद वापसी से 5 साल के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को नहीं दिया जाता।विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसे कर्मचारी के उन्नत कौशल से पर्याप्त सेवा अवधि के लिए लाभ मिले।

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    V. निष्कर्ष और सिफारिशें

    मुख्य बिंदुओं का सारांश

    दिल्ली विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए अध्ययन अवकाश का प्रावधान मौजूद है, जिसकी अधिकतम अवधि 2 वर्ष (24 महीने) है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह अवकाश दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘गैर-शिक्षण कर्मचारी (सेवा के नियम और शर्तें) नियम-2013’ के तहत असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) के रूप में माना जाता है। असाधारण अवकाश की अवधि के दौरान, कर्मचारी को कोई वेतन देय नहीं होता है, भले ही उसे कोई छात्रवृत्ति या वजीफा प्राप्त हो। शिक्षण कर्मचारियों के लिए पूर्ण वेतन के साथ अध्ययन अवकाश के नियम गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर लागू नहीं होते हैं। अध्ययन अवकाश के लिए पूर्व अनुमति, सार्वजनिक हित में अध्ययन का प्रमाण, सेवा में वापसी के लिए बॉन्ड (संभावित), और प्रगति रिपोर्ट जमा करना जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं।

    कर्मचारी के लिए आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव

    1. प्रशासनिक कार्यालय से संपर्क करें: अपने कॉलेज/विभाग के प्रशासनिक कार्यालय या दिल्ली विश्वविद्यालय के संबंधित मानव संसाधन (HR) विभाग से सीधे संपर्क करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे अध्ययन अवकाश के लिए नवीनतम और सबसे सटीक नियमों, विशेषकर कार्यकारी परिषद के किसी भी विशिष्ट अध्यादेश, पर मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि कर्मचारी को अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए सबसे सटीक और अद्यतन जानकारी मिले।
    2. लिखित आवेदन: अध्ययन अवकाश के लिए एक औपचारिक लिखित आवेदन प्रस्तुत करें। इस आवेदन में अध्ययन का उद्देश्य, अवधि और सार्वजनिक हित में इसका औचित्य स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। एक औपचारिक आवेदन भविष्य में किसी भी गलतफहमी से बचने और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
    3. अर्जित अवकाश का उपयोग: यदि कर्मचारी के पास संचित अर्जित अवकाश है, तो अध्ययन अवकाश के साथ उसका उपयोग करने पर विचार किया जा सकता है। यह कर्मचारी को अध्ययन अवधि के दौरान कुछ वेतन प्राप्त करने में मदद कर सकता है और वित्तीय बोझ को कम कर सकता है।
    4. व्यक्तिगत वित्तीय योजना: चूंकि अध्ययन अवकाश पर वेतन नहीं मिलता है, इसलिए इस अवधि के लिए एक ठोस वित्तीय योजना बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कर्मचारी को अपनी बचत, अन्य संभावित आय स्रोतों, या छात्रवृत्ति/वजीफा (यदि कोई हो) पर विचार करना चाहिए ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।

    बॉन्ड की शर्तों को समझें: यदि विश्वविद्यालय द्वारा बॉन्ड निष्पादित करने की आवश्यकता होती है, तो उस पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी सभी शर्तों को ध्यान से समझना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करें कि कर्मचारी सेवा में वापसी की अवधि और किसी भी वापसी दायित्व को पूरी तरह से जानता है।

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