CBSE की तीन भाषा नीति: सुप्रीम कोर्ट ने दिए पुनर्विचार के निर्देश, कक्षा 6 के छात्रों को मिल सकती है राहत

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ‘तीन भाषा नीति’ (Three Language Policy) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने बोर्ड को इस नीति पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है, जिससे विशेष रूप से कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की ‘तीन भाषा नीति’ (Three Language Policy) पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया है। जानें कोर्ट ने अंग्रेजी और ‘नेटिव’ शब्द पर क्या कहा।
CBSE Three Language Policy
सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति पर अहम टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी शिक्षा प्रणाली में भाषा के ढांचे और स्कूलों के सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों के संदर्भ में काफी अहम मानी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘नेटिव’ (Native) शब्द पर क्यों जताई आपत्ति?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने अंग्रेजी को गैर-मूल या ‘नॉन-नेटिव’ (Non-Native) भाषा की श्रेणी में रखने पर गंभीर सवाल उठाए।

  • औपनिवेशिक सोच का प्रभाव: कोर्ट ने कहा कि ‘नेटिव’ (मूल निवासी) शब्द के इस्तेमाल में औपनिवेशिक (Colonial) मानसिकता की झलक मिलती है।
  • ‘इंडिजिनस’ शब्द का सुझाव: जस्टिस बागची ने सुझाव दिया कि इसके बजाय ‘इंडिजिनस’ (देशज या स्वदेशी) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

क्या अंग्रेजी एक गैर-देशज भाषा है?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत में अंग्रेजी के ऐतिहासिक विकास और भारतीय समाज में इसकी गहरी जड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि नीति बनाना सरकार और बोर्ड का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक नजरिए से यह तय करना जरूरी है कि अंग्रेजी को ‘देशज’ माना जाए या ‘गैर-देशज’। इस स्पष्टता से मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की कई खामियां दूर की जा सकती हैं।

स्कूलों के लिए तीसरी भाषा लागू करने में बड़ी चुनौतियां

कक्षा 6 से तीसरी भाषा अनिवार्य करने के नियम पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। संसद की एक समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट (2026-27 के अनुमान) में कई व्यावहारिक समस्याओं को उजागर किया है:

  • शिक्षक भर्ती: क्षेत्रीय या नई भाषाओं के लिए योग्य शिक्षकों की कमी।
  • स्टडी मटेरियल: नई भाषा के लिए किताबों और उचित अध्ययन सामग्री का अभाव।
  • ट्रेनिंग और समय: स्कूलों और शिक्षकों को इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

शिक्षा मंत्रालय और सरकार के सुधारात्मक कदम

हालाँकि, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर कई सकारात्मक बदलाव भी किए हैं:

  • नया ढांचा: R1, R2, R3 के रूप में एक नया भाषाई ढांचा तैयार किया गया है।
  • 22 भाषाओं में अनुवाद: गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों की किताबों को 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है।
  • खेल आधारित लर्निंग: बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए 22 भाषाओं में ‘जादुई पिटारा’ जैसे लर्निंग किट तैयार किए गए हैं।
  • भाषा संगम: देशभर की भाषाओं से छात्रों का परिचय कराने के लिए यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

आगे क्या होगा? (निष्कर्ष)

संसदीय समिति की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि कक्षा 6 से तीसरी भाषा लागू करने से पहले जमीनी स्तर पर पर्याप्त तैयारियां नहीं की गई थीं। अब सभी की निगाहें CBSE और केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि क्या थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी में कोई बड़ा बदलाव होगा, या फिर छात्रों को कोई नई राहत दी जाएगी।

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