कल्पना कीजिए, कोलकाता का प्रसिद्ध ईडन गार्डन, गवर्नर का आवास राजभवन, या फिर ऐतिहासिक फोर्ट विलियम… अगर कोई कहे कि ये सारी जगहें किसी धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति हैं, तो आपका रिएक्शन क्या होगा? जी हाँ, वक्फ (WAQF) संशोधन कानून पास होने के बाद पश्चिम बंगाल में यही बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों का दावा है कि ये प्रमुख स्थल वक्फ की जमीन पर बने हैं, यहाँ तक कि कोलकाता एयरपोर्ट का एक हिस्सा भी!
क्या सचमुच ईडन गार्डन पर वक्फ का अधिकार?
देश में वक्फ की संपत्तियों का दायरा रेलवे और सेना के बाद तीसरे नंबर पर आता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में इसकी लिस्ट देखकर लोग हैरान हैं। कुछ वक्फ समर्थकों का कहना है कि ईडन गार्डन, फोर्ट विलियम, अलीपुर चिड़ियाघर का आधा हिस्सा, यहाँ तक कि मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों की जमीनें भी वक्फ के नाम हैं। सवाल यही है — क्या इन दावों में कोई सच्चाई है? भाजपा नेता शमिक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में इसी मुद्दे को उठाया, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के दावों के पीछे अभी कोई ठोस सबूत नहीं दिखे।
“80,548 संपत्तियों में से 380 पर कब्जा!”
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पश्चिम बंगाल में वक्फ की कुल 80,548 संपत्तियाँ हैं, जिनमें से 380 पर अवैध कब्जा है। इनमें कुछ ऐसी जगहें भी शामिल हैं, जिन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जा सकता है। मसलन, 4 जगहों पर अंग्रेजी मीडियम मदरसे, 9 पर अस्पताल, और 158 पर स्कूल चल रहे हैं। वहीं, बीरभूम में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी वक्फ की जमीन पर बना है।
क्लबों से भी वसूला जाता है किराया!
रोचक बात यह है कि कोलकाता के टॉलीगंज क्लब और रॉयल कलकत्ता गोल्फ क्लब जैसे शानदार अड्डों को भी वक्फ बोर्ड को सालाना 18 लाख से ज्यादा का किराया देना पड़ता है। यानी, ये क्लब भी टेक्निकली वक्फ की जमीन पर खड़े हैं।
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सवाल बड़ा, जवाब धुंधला
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई ईडन गार्डन या राजभवन जैसी आइकॉनिक जगहों पर वक्फ का मालिकाना हक हो सकता है? केंद्र और राज्य की सरकारें इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति में हैं। जनता के मन में यही उलझन है — “क्या ये दावे सियासी हैं या फिर ऐतिहासिक दस्तावेज़ों में कोई सच्चाई छिपी है?”




